Law and Order: जानें, क्या होती है घुड़सवार पुलिस, कैसे करती है काम?

 भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण दिया जाता है. इसी तरह से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लिए घुड़सवार पुलिस भी होती है. घुड़सवारी करने वाला पुलिस बल अलग होता है. आइए जानते हैं कि घुड़सवार पुलिस क्या होती है? यह कैसे काम करती है.



भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण दिया जाता है. इसी तरह से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लिए घुड़सवार पुलिस भी होती है. घुड़सवारी करने वाला पुलिस बल अलग होता है. आइए जानते हैं कि घुड़सवार पुलिस क्या होती है? यह कैसे काम करती है.


पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में घुड़सवार पुलिस


भारत के पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को समझाने के लिए कई तरह की जानकारियां मौजूद हैं. जो पुलिस विभाग के पदों और कार्य को परिभाषित करती हैं. पुलिस रेग्यूलेशन एक्ट में बिंदु 79 से 83 तक घुड़सवार पुलिस के बारे में बताया गया है. जिसके अनुसार, घुड़सवार पुलिस उत्सवों या अन्य आयोजनों में भीड़ नियंत्रण का काम करती है.


क्या है घुड़सवार पुलिस?

घुड़सवार पुलिस वह पुलिस होती है, जिसमें पुलिस के जवान घोड़े की पीठ पर सवार होकर इलाके या किसी स्थान विशेष पर गश्त करते हैं. आमतौर पर घुड़सवार पुलिस का काम औपचारिक होता है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर घोड़ों पर सवार पुलिस के जवानों को ऊंचाई का लाभ मिलता है और वे भीड़ नियंत्रण का काम बाखूबी करते हैं. घुड़सवार पुलिस को पार्कों और जंगली इलाकों में गश्त से लेकर विशेष अभियानों के लिए भी नियोजित किया जा सकता है. कई बार ऐसे मामले भी होते हैं, जिनमें संकरी गलियों और उबड़खाबड़ रास्तों पर पुलिस की कार नहीं जा सकती है, तो ऐसे में वहां घुड़सवार पुलिस के दल को भेजा जाता है. दंगा नियंत्रण के दौरान भी घुड़सवार पुलिस का इस्तेमाल किया जाता है. वे भीड़ से उपद्रव करने वालों या अपराधियों की पहचान कर उन्हें रोक सकते हैं. 


आपको बता दें कि यूनाइटेड किंगडम में घुड़सवार पुलिस को अक्सर फुटबॉल मैचों में देखा जाता है. यही नहीं वे कई कस्बों और शहरों की सड़कों पर दिन रात गश्ते करते भी नजर आते हैं. वहां पुलिस की मौजूदगी और अपराध नियंत्रण के तौर पर इसे देखा जाता है. वैसे भी घोड़ों की यात्रा करने की क्षमता बहुत अधिक होती है और वे ऐसे स्थानों पर भी जा सकते हैं, जहां पुलिस के दूसरे वाहन नहीं जा सकते हैं. घुड़सवार पुलिस के कुछ जवानों और इकाइयों को खोज और बचाव कार्य के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है.


अंग्रेजी शासन में घुड़सवार पुलिस

ब्रिटिशकालीन भारत में अपराध की रोकथाम और नियमित गश्त के लिए घुड़सावर पुलिस का इस्तेमाल काफी होता था. घोड़ों पर सवार पुलिसकर्मी अतिरिक्त ऊंचाई होने की वजह से भीड़-भाड़ वाले इलाकों में भी अच्छे से निगरानी करते थे. अधिकारियों के आदेश पर वे एक व्यापक क्षेत्र में निरीक्षण और निगरानी का काम करते थे, जिससे अपराध रोकने में मदद मिलती थी. जरूरत पड़ने पर वे लोगों और अधिकारियों को भी आसानी से खोज लेते थे. 


घुड़सवार पुलिस को नुकसान

कई तरह के फायदे के बावजूद घुड़सवार पुलिस के सामने एक बड़ा जोखिम यह रहता है कि जब कहीं भीड़ नियंत्रण के लिए घुड़सवार पुलिस कार्रवाई करती है, तो ऐसे में कुछ लोगों के कुचले जाने का डर बना रहता है, क्योंकि उसकी वजह से किसी इंसान को गंभीर चोट लग सकती है या उसकी मौत भी हो सकती है. यही नहीं घोड़े की सवारी करने वाले पुलिस अधिकारी या कर्मचारी भी ऐसे हालात में घोड़े से गिर घायल हो सकते हैं.

इतिहास

ऐसा माना जाता है कि फ्रांस में 18वीं सदी के दौरान फ्रेंच मारेचौसी के आस-पास ऐसी कांस्टेबुलरी बनी थी. लेकिन जानकारी के मुताबिक खराब सड़कों और व्यापक ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी करने और अपराध रोकने के मकसद से 20वीं सदी की शुरुआत में ही घुड़सवार पुलिस यूरोपीय राज्यों में एक बड़ी ज़रुरत बन गई थी. इसके बाद औपनिवेशिक और उत्तर-औपनिवेशिक युग के दौरान पूरे अफ्रीका, एशिया और अमेरिका में संगठित कानून-प्रवर्तन निकायों की स्थापना के साथ ही घुड़सवार पुलिस को लगभग पूरी दुनिया में अपनाया गया. जिसमें रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस, मैक्सिकन रूरल पुलिस, ब्रिटिश दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस, तुर्की/साइप्रस और कैबेलेरिया पुलिस की घुड़सवार शाखा के साथ-साथ स्पेन के होम गार्ड भी शामिल थे, जो गश्त और निगरानी के लिए घोड़ों का इस्तेमाल करते थे

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